ब्रह्माकुमारीज सकारात्मक सोच से कर रही विश्व परिवर्तन का कार्य: महाराजा मैसूर

ब्रह्माकुमारीज सकारात्मक सोच से कर रही विश्व परिवर्तन का कार्य: महाराजा मैसूर

 

 

– मैसूर के महाराजा एचएच महिषापुर दिशा यदुवीरा कृष्णादत्ता ने कहा भारत विश्व शांति के लिए प्रयासरत है
– वैश्विक शिखर सम्मेलन का जोरदार आगाज
– देश-विदेश से पहुंचीं पांच हजार से अधिक नामचीन हस्तियां और लोग

  • 04 चार दिन चलेगा सम्मेलन
  • 05 हजार से अधिक लोग पहुंचे भाग लेने
  • 19 विधायक देशभर से ले रहे हैं भाग
  • 07 केंद्रीय औ राज्य मंत्री करेंगे शिरकत
  • 04 खुले सत्र किए जाएंगे आयोजित
  • 04 मेडिटेशन सत्र भी होंगे

10 सितंबर, आबू रोड/राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन आबू रोड में आयोजित वैश्विक शिखर सम्मेलन का शनिवार शाम को जोरदार आगाज हो गया। सम्मेलन का आयोजन विश्व शांति का अग्रदूत भारत विषय पर किया जा रहा है। सम्मेलन में भाग लेने के लिए देश-विदेश से पांच हजार लोग और नामचीन हस्तियां पहुंचीं हैं। स्वागत सत्र में नेपाल के डिवाइन कल्चरण ग्रुप के कलाकारों ने मयूर डांस पेश किया तो पूरा डायमंड हॉल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।
चार दिवसीय सम्मेलन के स्वागत सत्र में मैसूर के महाराजा एचएच महिषापुर दिशा यदुवीरा कृष्णादत्ता ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान देश और समाज हित में बहुत ही सराहनीय कार्य कर रही है। यहां से लोगों को सकारात्मक सोच से विश्व परिवर्तन की शिक्षा दी जा रही है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बहुत कार्य किए जा रहे हैं। मैं यहां आकर बहुत प्रसन्न हूं। भारत पूरे विश्व में शांति लाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है।

भारत ने कभी शांति का दामन नहीं छोड़ा-

दिल्ली से आए दूरदर्शन के कंसल्टेंट एडिटर मनीष वाजपेयी ने कहा कि देवो शांति का जो श्लोक है ये गवाही देता है कि भारत दुनिया को अतीत से आज तक शांति देता रहा है। भारत कई खण्डों और मोड़ से गुजरा है। यहां तक कि कई आक्रांता आए लेकिन यहां की मिट्टी का ही कमाल है कि उन्हें यहां आकर शांति और सम्मान ही मिला है। भारत ने कभी शांति का दामन नहीं छोड़ा है। भारत का ये पारंपरिक विचार भारत के हर नागरिकों में रचा बसा है। ये बात विदेश के लोगों ने भी कही है कि पूरी दुनिया घूम लीजिए लेकिन भारत जैसी शांति कहीं और नहीं मिल सकती है। भारत ने दुनिया को गले लगाया है। भारत ने आदिकाल से ही वसुधैव कुटुम्बकम का नारा दिया है। हमारे यहां अतिथि देवो भव: की परंपरा है। हमारे आचार-विचार में शांति की बात होती है। हजारों कालखण्डों के बाद शांति जैसे शब्दों का सृजन होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ में शांति की जब भी बात आती है तो विश्व शांति में सबसे पहले भारत का नाम आता है। ब्रह्माकुमारीज में सभी ज्ञान का भंडार हैं।

देश की तरक्की में अपना सहयोग देंगे-
इंडियन बैंडमिंटन टीम के खिलाड़ी तरूण भिलन ने कहा कि यहाँ आकर मैंने सीखा है कि एक खिलाड़ी के साथ देश की तरक्की में युवा होने के नाते अपना सहयोग दे पाऊं। साथ ही देश की उन्नति में अपना सहयोग कर सकूं। ब्रह्माकुमारीज के मल्टीमीडिया प्रमुख बीके करुणा भाई ने कहा कि भारत की भावना वसुधैव कुटुम्बकम की रही है। सारा विश्व एक परिवार है। परमात्मा एक हैं। शिव परमात्मा विश्व की सभी आत्माओं के परमपिता हैं। हमने विश्व को एकता में सूत्र में बांधने का संदेश दिया है।

बहुत शांति की अनुभूति हो रही है-
वरिष्ठ पत्रकार मनीष ने कहा कि मुझे आज यहां आकर महसूस हो रहा है कि मैं यहां पहले क्यों नहीं आया। यहां आकर अदभुत सुकून और शांति महसूस की। आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम जब आजादी का शतक पूरा करेंगे तो निश्चित तौर पर विश्व गुरु के तौर पर होंगे।

आजादी के 75 साल में हमने कभी किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया है। यहाँ आकर मैंने जाना है कि जरूरी नहीं है कि दुनिया में बदलाव लाने के लिए हमें घरबार छोडऩे की जरूरत है। हम घर में रहते हुए भी विश्व शांति के कार्य में अपना सहयोग कर सकते हैं।
आज भी हम बुराइयों में जकड़े हुए हैं

जयपुर सबजोन की निदेशिका बीके सुषमा ने कहा कि हमने वर्षों की गुलामी के बाद आजादी पाई है लेकिन आज भी हम व्यसन, विकारों और बुराइयों की गुलामी में जकड़े हुए हैं। अब समय आ गया है कि परमपिता परमात्मा हमें पुकार रहे हैं कि मेरे बच्चों मेरे बताए मार्ग पर चलो तो मैं तुम्हारा कल्याण कर दूंगा।

भारत शांतिदूत है था और रहेगा। शांति ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके गीता ने राजयोग मेडिटेशन की गहन अनुभूति कराई। स्वागत भाषण रुरल विंग के उपाध्यक्ष बीके राजू ने दिया।

कटक की निदेशिका बीके कमलेश ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं। संचालन जयपुर की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके चंद्रकला ने किया। आभार बीके हरीश ने माना।

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