ENVIRONMENT NOTES FOR CTET/STET/SUPERTET

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ENVIRONMENT NOTES FOR CTET/STET/SUPERTET

 

भारत में लगभग 89,451 प्रकार के जीव-जंतु पाए (ctet evs pedagogy notes) जाते हैं। इनमें 2,577 प्रोटिस्टा (आद्यजीव); 68,389 एंथ्रोपोडा; 119 प्रोटोकॉर्डेटा; 2,546 प्रकार की मछलियाँ; 209 प्रकार के उभयचरी; 456 प्रकार के सरीसृप; 1,232 प्रकार के पक्षी और 390 प्रकार के स्तनपायी जीव; पाँच हजार से कुछ अधिक मोलस्क प्राणी और 8,329 अन्य अकशेरुकी सम्मिलित हैं।

 

इनमें से लगभग 39 स्तनी, 72 अभयचर व सरीसृप वनयी प्राणियों के विलुप्त (Extinct) होने की संभावना है। इसलिए इन्हें क्षति-आशंकित जातियों में गिना जाता है। इस श्रेणी में आने वाले प्रमुख वनीय प्राणी हैं—बाघ, गिरशेर, घड़ियाल, मगर, एक सींग वाला गैंडा, कश्मीरी हिरण, कस्तूरी वाला मृग, काला, मृग, हिमालयन मस्क हिरण, कृष्णसार, चीतल, भेड़िया, नीलगाय, भारतीय कुरंग, बारहसिंगा, हसावर, हवासीता, सारंग, श्वेत सारस, धूसर बगुला, पर्वतीय बटेर आदि। इनमें से कुछ प्राणियों के लिए राष्ट्रीय उद्यानों तथा शरणस्थलों की स्थापना भी की गई है। इनके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा कुछ परियोजनाएं जैसे-बाघ परियोजना (Tiger Project), हाथी परियोजना (Elephant Project), घड़ियाल प्रजनन तथा पुनर्स्थापन परियोजना (Crocodiles Breeding and Rehabilitation Project), गिर शेर शरण स्थल परियोजना (Gir Lion Sanctuary Project) आदि, संचालित की जा रही हैं।

भारत में वन्य जीवन-(ctet evs pedagogy notes)

 

स्तनपायी जीवों में हिमालय की बड़े आकार वाली जंगली – भेड़ें, दलदली मृग, हाथी, गौर या भारतीय भैंसा, नील गाय, चौसिंगा मृग शामिल हैं। बिल्ली जाति के पशुओं में सिंह और शेर सर्वाधिक भव्य दिखते हैं। इनके अलावा, हिम तेंदुए, चित्ती वाले तेंदुए तथा चितकबरे तेंदुए जैसे अन्य विशिष्ट प्राणी भी पाए जाते हैं। अनेक किस्म के पक्षी जैसे-बत्तख, मैना, कबूतर, धनेश, तोते, तीतर, मुर्गियाँ और सुनहरे रंग वाले पक्षी जंगलों और दलदली भूमि में पाए जाते हैं। नदियों और झीलों में मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं।

घड़ियाल सिर्फ भारत में ही पाए जाते हैं। पूर्वी तट और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह – में खारे पानी के मगरमच्छ पाए जाते हैं। सन् 1974 में शुरू की गई मगरमच्छ पालन योजना के जरिए मगरमच्छों की नस्ल को – लुप्त होने से बचाया गया है। विशाल हिमालय श्रृंखला में कई
अत्यंत आकर्षक जीव-जंतु पाए जाते हैं जिनमें जंगली भेड़ और -बकरियाँ, मारखोर, साकिन, छछंदर और टापिर शामिल हैं।
पांडा और हिम तेंदुआ ऊँचे पहाड़ी स्थानों में पाए जाते हैं।

 

कृषि और आवास के लिए भूमि के विस्तार से वन संपदा नष्ट होती जा रही है। भूमि का अधिक-से-अधिक इस्तेमाल, प्रदूषण, कीटनाशकों के प्रयोग, सामुदायिक संरचना के असंतुलन, बाढ़, सूखा और तूफान आदि के प्रकोप से भी पेड़-पौधों को काफी क्षति पहुँचती है। 89 से अधिक प्रजातियों के स्तनपायी जीवों, पक्षियों की 82, सरीसृप की 26, उभयचरी जीवों की तीन और मछलियों की दो प्रजातियाँ तथा बड़ी संख्या में तितलियों, पतंगों और कीड़े-मकोड़ों के लुप्त हो जाने का खतरा है।

 

वन संपदा की दृष्टि से भारत काफी संपन्न है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में भारत का विश्व में दसवाँ और एशिया में चौथा स्थान है। अब तक लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग का सर्वेक्षण करने के पश्चात् भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण संस्था ने पेड़-पौधों की 46 हजार से अधिक प्रजातियों का पता लगाया है। वाहिनी वनस्पति के अंतर्गत 15 हजार प्रजातियाँ हैं। लेकिन खेती, उद्योग और नगर विकास के लिए जंगलों की कटाई के कारण कई भारतीय पौधे लुप्त हो रहे हैं। पौधों की लगभग 1336 प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है तथा लगभग 20 प्रजातियाँ पिछले 60 से 100 वर्षों के दौरान दिखाई नहीं पड़ी हैं। संभावना है कि ये प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण रेड डाटा बुक नाम से लुप्त प्राय पौधों की सूची प्रकाशित करता है।

 

राष्ट्रीय जैविक विविधता नीति एवं कार्य रणनीति 6 जनवरी, 2006 को जारी की गई जिसका उद्देश्य जैविक विविधता के संरक्षण और निरंतर प्रयोग के वर्तमान प्रयासों को पुष्ट करना है। जैविक विविधता विधेयक-2002 को संसद में मई 2002 में प्रस्तुत किया गया। यह विधेयक 2 दिसंबर, 2002 को लोकसभा में तथा 11 दिसंबर, 2002 को राज्यसभा द्वारा पारित कर दिया गया। इस विधेयक का प्रमुख उद्देश्य देश की प्रचुर जैव विविधता का संरक्षण, विदेशी संगठनों तथा लोगों को इसके एकपक्षीय प्रयोग से रोकना तथा जैव पायरेसी को रोकना है।

 

प्राकृतिक संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयास – (ctet evs pedagogy notes)

सन् 1952 में भारतीय वन्य जीवमंडल (IBWL-Indian Board for Wild Life) का गठन किया गया। सन् 1972 में वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम बनाया गया जिसके अंतर्गत वन्य जीवन को वैधानिक संरक्षण दिया गया, वन्य प्राणियों के शिकार पर प्रतिबंध लगाए गए तथा चोरी से शिकार करने वालों को कठोर दंड देने का प्रावधान किया गया। शेर, बाघ, गैंडे,व हाथियों का शिकार करना दंडनीय अपराध घोषित किया गया।

सन् 1980 में वन (संरक्षण) विधेयक द्वारा केंद्रीय शासन की अनुमति के बिना किसी भी जंगल का किसी भी कार्य के लिए विनाश वर्जित किया गया। अत्यधिक संकटापन्न जातियों के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित किये गए हैं। उत्तर प्रदेश में चमोली के निकट कंचूला खरक में कस्तूरी मृग के लिए पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। लखनऊ के निकट कुकरैल के जंगल में बारहसिंघे, चौसिंघा, जंगली कुत्ते, लोमड़ी आदि का पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है।

 

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India-BSI)

 

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की स्थापना 13 फरवरी, 1890 को हुई थी। इसका मुख्यालय कोलकाता में है तथा देशभर में इसके 10 सर्किल कार्यालय हैं जिनका मुख्य उद्देश्य देश के वनस्पति संसाधनों का अन्वेषण और आर्थिक महत्व की वनस्पति प्रजातियों का अभिनिर्धारण करना है। देश के वैज्ञानिक विकास के रूप में इसे उत्तरवर्ती योजना अवधियों में पुनः संगठित किया गया। बीएसआई के कार्यात्मक बेस के रूप में इसका और विस्तार किया गया ताकि इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के नए क्षेत्रों को जोड़ा जा सके।

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भारतीय प्राणि सर्वेक्षण (Zoological Survey of India-ZSI)

भारतीय प्राणि सर्वेक्षण 1916 में अपनी शुरूआत से देश की विशद्ध रूप से समृद्ध प्राणिजात से संबंधित जानकारी को बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, अन्वेषण एवं अनुसंधान कार्य कर रहा है। जैडएसआई का मुख्यालय कोलकाता में है तथा देश के विभिन्न भागों में स्थित इसके 16 क्षेत्रीय केंद्रों ने हाल ही में पाँच प्रमुख कार्यक्रमों के अधीन किये जाने वाले सर्वेक्षण एवं अध्ययनों का वर्गीकरण करके अपनी कार्य योजना को रिओरिएंट किया है।

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भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India)

भारतीय वन सर्वेक्षण, जिसकी स्थापना 1 जून, 1981 को हुई थी, प्रशिक्षण, अनुसंधान व विस्तार संबंधी सेवाएं प्रदान करने के अतिरिक्त, वन आवरण व वन संसाधनों संबंधी सूचना व आँकड़ा संग्रहण में लगा हुआ है। इसका मुख्यालय देहरादून में है तथा इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय, शिमला, कोलकाता, नागपुर एवं बंगालुरु में स्थित हैं।

जैवमंडल रिजर्व (Biosphere Reserves)

विभिन्न देशों में जैवमंडल रिजरों की स्थापना की शुरूआत 1971 में शुरू हुए यूनेस्को (UNESCO) के मानव व जैवमंडल कार्यक्रम (Man and Biosphere-MAB Programme) के तहत हुई थी। दुनिया का पहला जैवमंडल रिजर्व 1979 में स्थापित किया गया था। तब से लेकर अब तक दुनिया भर के 102 देशों में 482 जैवमंडल रिजर्व स्थापित किये जा चुके हैं। भारत में वर्तमान जैवमंडल रिजों की संख्या 14 है।

 

हाथी परियोजना (Project Elephant)

हाथियों की अभिज्ञात व्यवहार्य आबादी को उनके प्राकृतिक वास स्थलों में दीर्घकालिक उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए हाथी परियोजना फरवरी 1992 में शुरू की गई थी। इस परियोजना को आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, असोम, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मेघालय, नागालैंड, उड़ीसा, तमिलनाडु, उत्तराखंड राज्यों में क्रियान्वित किया जा रहा है। राज्यों को परियोजना के उद्देश्य को हासिल करने के लिए वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही हैं। हाथियों की कम संख्या वाले अन्य राज्यों को जनगणना, क्षेत्रीय स्टाफ के प्रशिक्षण एवं मानव-हाथी संघर्ष के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है।

 

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राष्ट्रीय पार्क (National Parks)

वर्तमान समय में देशभर में 96 राष्ट्रीय पार्क अस्तित्वमान हैं जो (ctet evs pedagogy notes) कुल 38029.18 वर्ग किमी के दायरे में फैले हैं। यह देश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 1.16% हिस्सा है। इन राष्ट्रीय पार्कों के अलावा 74 अन्य पार्कों की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है जिसकी मंजूरी के बाद देश में राष्ट्रीय पार्कों की कुल संख्या 170 हो जाएगी।

 

वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries)

देश में इस समय 510 अभयारण्य हैं जो 1,18,640.77 वर्ग किमी (देश के क्षेत्रफल का 3.61% हिस्सा) के दायरे में फैले हैं। इनके अलावा संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क रिपोर्ट में 217 अन्य अभयारण्यों की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।

 

बाघ परियोजना (Project Tiger)

 

बाघों की घटती संख्या के कारण इस प्रजाति के लुप्त हो जाने के खतरे का सामना करने के लिए सरकार ने 1973 में देशभर में बाघ परियोजना की शुरूआत की थी। 1973-74 के दौरान पूरे देश में 9 टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए जिनकी संख्या बढ़कर अब 29 हो चुकी है।

 

 

 

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