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  • तनु HCI द्वारा  ग्लूकोज में अपघटित हो जाता है।
  • कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत आलू, फल (केला,  आम), अनाज (चावल, गेहूँ, मक्का), शर्करा (शहद, गन्ना, चुकंदर, जैम) रोटी, दूध आदि हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट की अत्यधिक मात्रा लेने से पाचन तंत्र संबंधी रोग हो जाते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट की अत्यधिक मात्रा लेने से बच्चों एवं वयस्कों में मोटापा हो जाता है।
  • वसा, वसीय अम्लों एवं ग्लिसरोल से बना यौगिक है जो कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) एवं ऑक्सीजन (O) का बना होता है।
  • इसमें अत्यधिक कैलोरी (ऊर्जा) होती है और यह  आवश्यक वसा अम्लों के मुख्य स्रोत है।
  • 1 ग्राम वसा के ऑक्सीकरण द्वारा 37 किलो जूल या 9.65 किलो कैलोरी ऊर्जा उत्पन्न होती है।
  • यह जल में अविलेय एवं एसीटोन, बैंजीन, क्लोरोफार्म आदि में विलेय होती है।
  • यह कोशिकाद्रव्य, कोशिका कला आदि में मुख्य रूप से पाई जाती है।
  • जंतु वसाएँ अर्द्ध ठोस होती हैं जबकि वनस्पति वसाएँ  तरल रूप में होती हैं तथा तेल कहलाती हैं।
  • वसा का अंततः लाइपेज एंजाइम द्वारा छोटी आंत में . हाइड्रोलिसिस होता है।
  • घी, मक्खन, बादाम, पनीर, अंड योक, मांस, सोयाबीन और सभी वनस्पति तेल वसा के मुख्य स्रोत है।
  • वसा की अल्पता से त्वचा सूखी हो जाती है।
  • वसा की कमी के कारण वसा में घुलनशील विटामिनों की भी कमी हो जाती है।
  • वसा की अत्यधिक मात्रा के सेवन से मोटापा हो जाता है।
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि से हृदय रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

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  • प्रोटीन शब्द जे. बर्जीलियस ने 1930 में प्रतिपादित किया था।
  • प्रोटीन अमीनो अम्लों का बहुलक है। – प्रोटीन कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O) एवं नाइट्रोजन (N) से बनी होती हैं।
  • कुछ प्रोटीनों में गंधक (S), फास्फोरस (P) और लौह (Fe) भी पाया जाता है।
  • प्रोटीनों में लगभग 20 प्रकार के अमीनो अम्ल पाए जाते हैं।
  • प्रोटीन के मुख्य स्रोत दालें, मछली, अंडा, पत्तीदार सब्जियाँ, दूध, फल, सोयाबीन, मटर, सेम, पनीर, दही आदि हैं।
  • प्रोटीन की कमी से बच्चों में सूखा रोग एवं क्वाशरकोर रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
  • विटामिन शब्द फंक ने प्रतिपादित किया था। ।
  • इन्हें इनकी घुलनशीलता के आधार पर दो भागों में विभाजित किया जाता है : जल में घुलनशील विटामिन : विटामिन B-कॉम्पलैक्स, विटामिन C तथा वसा में घुलनशील विटामिन : विटामिन A, विटामिन D, विटामिन E, विटामिन K
  • धातु, अधातु एवं उनके लवण खनिज लवण कहलाते हैं। ये हमारे शरीर का लगभग 4% भाग बनाते हैं।
  • खनिज लवण दो प्रकार के होते हैं : वृहत्त पोषक जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है; उदाहरण-Ca, P, K, S, Na, CI और Mg और सूक्ष्म पोषक जिनकी शरीर को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है; उदाहरण-I, Fe, Co, F, Mo और Fe
  • जल एक अकार्बनिक पदार्थ है।
  • मानव शरीर में लगभग 65% जल होता है।
  •  यह पसीने एवं वाष्पन द्वारा शरीर का ताप नियंत्रित करता है।
  • यह पाचन, परिवहन एवं उत्सर्जन में सहायक है।
  • इसके मुख्य स्रोत उपापचयी जल, तरल भोजन और पीने का जल है।
  • इसकी कमी से निर्जलीकरण (Dehydration) हो जाता है।
  • रेशा कुछ भोज्य पदार्थों में पाया जाने वाला तंतुमय  पदार्थ है।
  • शरीर की वृद्धि नहीं करता क्योंकि हम इसका  पाचन नहीं कर पाते ।
  •  कब्ज को रोकने हेतु अधिक मात्रा में भोजन में लिया जाता है।
  •  शरीर में जल को नियंत्रित करता है तथा आहारनाल के मार्ग को साफ रखता है।
  • इसके मुख्य स्रोत, सलाद, अनाजों की बाह्य परत, सब्जियाँ एवं दलिया है।
  • वह आहार जिसमें सभी पोषक तत्व उचित अनुपात में  सम्मिलित होते हैं, संतुलित आहार कहलाता है।
  • संतुलित आहार प्रत्येक व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और कार्य के अनुसार होता है।
  • लाइसोसोम एक झिल्ली द्वारा घिरे, थैलीनुमा कोशिकांग हैं जिनमें अपघटनीय एंजाइम पाए जाते हैं। ये बाह्य कोशिका कणों और अंतर कोशिका पदार्थों का पाचन करते हैं। बाह्य कोशिकीय पाचन तथा स्वलयन के कारण इन्हें आत्महत्या की थैली भी कहते हैं।
  • कोशिका भित्ति परागम्य एवं सेलुलोज द्वारा निर्मित होती है। यह कोशिका को सामर्थ्य एवं कठोरता प्रदान करती है तथा पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायक है।
  • कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिकाओं में होती है।
  • कोशिकाद्रव्य स्टार्च व ग्लाइकोजन युक्त तरल पदार्थ है। इसमें कोशिकांग एवं अन्य पदार्थ पाए जाते हैं।
  • अंतः प्रदृव्यी जालिका झिल्लीयुक्त जालिका है जिस __पर राइबोसोम उपस्थित या अनुपस्थित होते हैं।
  • यह कोशिका को यांत्रिक आधार प्रदान करती हैं तथा परिसंचरण और प्रोटीन, लिपिड तथा वसा संश्लेषण में सहायक है।
  • केंद्रक अंडाकार, दोहरी झिल्लीयुक्त कोशिकांग है जिसमें क्रोमेटिन पाया जाता है।
  • केंद्रक उपापचयी क्रियाओं का नियंत्रण, कोशिका विभाजन का नियंत्रण, प्रोटीन संश्लेषण में सहायक आदि कार्य करता है।
  • गुणसूत्र वंशागति के वाहक होते हैं।
  • माइटोकॉण्डिया दोहरी झिल्ली से घिरा होता है तथा कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है। पेरीमाइटो-कॉण्ड्रियल स्थान में मैट्रिक्स पाया जाता है।
  • इसमें कोशिकीय श्वसन या भोजन का ऑक्सीकरण होकर ATP संग्रहित होते हैं। यह कोशिका का ‘पावर हाउस’ कहलाता है।
  • तारककाय झिल्ली रहित व सूक्ष्म नलिकाओं का बना कोशिकांग होता है। यह कोशिका विभाजन में सहायक होता है।
  •  तारककाय केवल जंतु कोशिकाओं में होता है।
  • गॉल्जीकाय चपटी पट्टिकाओं, नलियों एवं थैलियों  का बना होता है यह गोंद, श्लेष्मा, हार्मोंस एवं एंजाइम का स्रावण
    करता है।
  • लाइसोसोम का निर्माण भी गॉल्जीकाय द्वारा ही किया जाता है।
  • फोन्टाना ने 1781 में केंद्रिका की खोज की थी।

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