कोचिंग संस्थानों पर लाकडाउन की मार

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कोचिंग संस्थानों पर लाकडाउन की मार

 

निजी कोंचिंग संचालकों को (Lockdown on coaching institutes) इस महामारी के चलते कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है जो निम्नलिखित है ।

1. जो शिक्षक किसी किराये के मकान में अपनी कोंचिंग का संचालन कर रहे है और सरकार ने संपत्ति कर में बढ़ोत्तरी की हैं तो उस किराये को निकालना काफी मुशिकल होगा जिसके पीछे कुछ कारक उत्तरदायी होंगे जैसे सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते समय अगर आप पहले एक बेंच पर 3 बच्चे बैठ सकते थे तो अब एक ही बैठ सकेगा और पहली बेंच के पीछे वाली बेंच को भी एक मीटर दूरी पर स्तिथ करना होगा जिससे उनती ही जगह में बच्चों की संख्या में कमी आएगी। अगर ऐसा हुआ तो उससे आमदनी पर गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है ।

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2. गुजरात के तक्षशिला शिक्षण संस्थान में हुए अग्नि हादसे से सभी को कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ को सख्ती से लागू करने के आदेश आये और लगभग सभी संस्थानों ने इन आदेशों का पालन भी किया । ऐसा ही अब इस महामारी के चलते नए आदेश आएंगे जिसका पालन करना पड़ेगा । जैसे – शिक्षक व विद्यार्थियों दोनो को सेनेटाइजर का प्रयोग सख्ती से करना व करवाना पड़ेगा ,मास्क पहनना जरूरी होगा , ऐसे इंतजाम करने होंगे जिससे सुनिश्चित किया जा सके कि कोई बाहरी व्यक्ति अगर कोचिंग संस्थान में प्रवेश करता है तो वह भी उन नियमो का पालन करे , सबके नाम पता टेलीफोन नंबर की भी जांच स्वम करनी होगी जिससे अगर कोई संदिग्ध या संक्रमित व्यक्ति हो तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस प्रशासन को दी जा सके ।

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3. आर्थिक मंदी की वजह से सभी शिक्षकों को विद्यार्थियों की फीस में कटौती करनी पड़ सकती है क्योंकि विद्यार्थियों के परिजन भी इस महामारी से आर्थिक संकट से गुज़र रहे है जिससे शिक्षको को होने वाली आय में कटौती होगी जिससे शिक्षकों को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ेगा।

4. विद्यर्थियों द्वारा मुह पर लगाये गए मास्क व हाथों में पहने जाने वाले दस्तानों के प्रयोग से कुछ नकारात्मक व आपराधिक तत्वों को भी बढ़ावा मिलेगा जो कोचिंग संस्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे भी व्यक्ति की सही पुष्टि करने में असमर्थ होंगे। जिससे कोचिंग संचालको को सुरक्षा की दृष्टि से कुछ और भी इंतजाम करने होंगे जो शिक्षकों की आर्थिक समस्या को बढ़ा सकते है ।

कोचिंग संस्थानों पर लाकडाउन की मार

5. महामारी के समाप्त होने के पश्चात व लोकड़ाऊंन खुलने के बाद भी लगभग सभी परिवार में अपने बच्चों को बाहर निकलने पर भी चिंता का विषय बना रहेगा जिससे हो सकता है कि इस बार काफी कम बच्चे बाहर जाकर कोचिंग संस्थान से शिक्षा ग्रहण करें । परिवारजन के अपने बच्चों को बाहर जाने पर रोक लगने के निर्णय से भी शिक्षकों को पिछले वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष ज्यादा आर्थिक मार देखने को मिले।

6. कुछ शिक्षक ऑफ़लाइन से ऑनलाइन में जाने का प्रयास भी कर रहे है पर सच्चाई ये है कि सभी डिजिटल व ऑनलाइन सोशल सर्विस इस बात से भली भांति परिचित है कि अब सब लोग डिजिटल सेवा से जुड़ रहे है जिससे डिजिटल सर्विस देने वाली कंपनियां जैसे यूट्यूब , टेलीग्राम भी इस बात का पूरा फायदा उठाएगी और अपने यूजर को देने वाले मुनाफे में कटौती कर देंगी। इससे भी नए ऑनलाइन सर्विस देंने वाले शिक्षकों को भी कोई खास मुनाफा प्राप्त नही होगा ।और उन्हें ऑफ़लाइन शिक्षा पद्द्ति से भी हाथ धोना पड़ सकता है ।

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ये कुछ महत्वपूर्ण बिंदु है जिसपर हम सभी को एक साथ मिलकर विचार करना चाहिए और सभी की सहमती से कुछ ऐसे समाधान निकाले जिससे उच्च शिक्षक वर्ग व निम्न शिक्षक वर्ग दोनो को कोई भी असुविधा न हो , आर्थिक मंदी से भी निदान पाया जा सके व खुदको व शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को भी सुरक्षित किया जा सके।

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