Environment notes-MP TET Grade 3 Study Material

MP-TET-ENVIRONMENT-NOTES

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पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

ब्रह्मांड की उत्पत्ति (ORIGIN OF THE UNIVERSE)

 

आधुनिक समय में ब्रह्मांड की उत्पत्ति सम्बन्धी सर्वमान्य सिद्धांत (MP TET ENVIRONMENT NOTES)  बिग- बैंग सिद्धांत ( Big bang theory) है। इसे विस्तार ब्रह्मांड परिकल्पना (Expanding universe Spothesis) भी कहा जाता है। 1920 ई. में एडविन हब्बल STwin Hubble) ने प्रमाण दिए कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है

बिग-बैंग सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार निम्न अवस्थाओं में हुआ है :

(i) आरम्भ में वे सभी पदार्थ, जिनसे ब्रह्मांड बना है, आटे छोटे गोलक (एकाकी परमाणु) के रूप में एक ही स्थान पर
थत थे। जिसका आयतन अत्यधिक सूक्ष्म एवं तापमान तथा  अनंत था।

(ii) बिग-बैंग की प्रक्रिया में इस अति छोटे गोलक में भोकम विस्फोट हुआ । इस प्रकार की विस्फोट प्रक्रिया से वृहत् बस्तार हुआ । वैज्ञानिकों का विश्वास है कि बिग-बैंग की घटना आज से 13.7 अरब वर्ष पहले हुई थी। ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्तार के कारण कुछ ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गई।

खगोलीय पिंड (CELESTIAL BODIES)

सूर्य, चन्द्रमा और रात के समय आकाश में जगमगाते (MP TET ENVIRONMENT NOTES) पिंड खगोलीय पिंड कहलाते हैं। इन्हें आकाशीय पिंड भी कह जाता है। हमारी पृथ्वी भी एक खगोलीय पिंड है।

जिन खगोलीय पिंडों में अपनी ऊष्मा और प्रकाश होता। है तारे कहलाते हैं। वास्तव में ये पिंड गैसों से बने हैं और आकार में बहुत बड़े और गर्म हैं | इनसे बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा व प्रकाश का विकिरण भी होता है। सूर्य भी एक तारा है। तारों की तुलना में सूर्य हमारे निकट है

तारों का निर्माण (FORMATION OF STARS) :

एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह होती है। आकाशगंगाओं का विस्तार इतना अधिक होता है कि उनकी दूरी हजारों प्रकाश वर्षों में (Light years) मापी जाती है।

आकाशगंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है जिसे निहारिका (Nebula) कहा गया । क्रमशः इस बढ़ती हुई निहारिका में गैस के झुंड बढ़ते-बढ़ते घने गैसीय पिंड बने, जिनसे तारों का निर्माण आरंभ हुआ। ऐसा विश्वास किया जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्ष पहले हुआ।

प्रकाश वर्ष (Light year) समय की नहीं वरन् दूरी का माप है। (MP TET ENVIRONMENT NOTES) प्रकाश की गति 3 लाख किमी. प्रति सेकण्ड है। विचारणीय है कि एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करेगा, वह एक प्रकाश वर्ष होगा। यह 9.461 x 1012 किमी. के बराबर है।

मंदाकिनी (GALAXIES)

लाखों तारों के समूहों को मंदाकिनी कहते हैं। हमारी मंदाकिनी का नाम आकाशगंगा है। जिन संपूर्ण ब्रह्मांड में शायद लाखों मंदाकिनियाँ हैं। सूर्य के सबसे निकटवर्ती तारे प्रौक्सिमा सैंटोरी का प्रकाश हम तक लगभग चार वर्ष में पहुंच पाता है।

हमारा सौर परिवार (OUR SOLAR SYSTEM)

हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह हैं। निहारिका को सौरमंडल का जनक माना जाता है। हमारे सौरमंडल में सूर्य (तारा), 8 ग्रह, 173 उपग्रह, लाखों छोटे पिंड जैसे क्षुद्र ग्रह (ग्रहों के टुकड़े Asteroids), धूमकेतु (Comets) एवं वृहत् मात्रा में धूल के कण है।

सूर्य(THE SUN)

सौर परिवार के केन्द्र में स्थित है। यह सौर परिवार का सबसे बड़ा सदस्य है। हमारी पृथ्वी से तो दस लाख गुना बड़ा है।

पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। प्रकाश की गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकण्ड है। इतनी तेज गति से चलते हुए भी सूर्य का प्रकाश लगभग 8 मिनट में पृथ्वी पर पहुँच पाता है।

क्षुद्र ग्रह (ASTEROIDS)

मंगल और बृहस्पति के बीच में अनेक छोटे पिंडों के झुंड हैं। पिंडों के ये झुंड भी सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। इन्हें क्षुद्र ग्रह कहते हैं। ऐसा विश्वास है कि क्षुद्र ग्रह उस ग्रह के टुकड़े हैं जो अपने जन्म के बाद विस्फोट के कारण बिखर गये हैं।

उपग्रह (Satellite) उपग्रह अपने-अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं और उनके साथ ही सूर्य के इर्द-गिर्द भी चक्कर लगाते हैं। उदाहरण के लिए चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह है। यह पृथ्वी की परिक्रमा करने के साथ ही सूर्य की भी परिक्रमा करता है।

अब तक हमारे सौर परिवार में 173 उपग्रहों की खोज हो चुकी है। बुध और शुक्र को छोड़कर शेष सभी ग्रहों के एक या उससे अधिक उपग्रह हैं।

हमारे सौर मंडल में ग्रह (PLANETS IN OUR SOLAR SYSTEM)

भीतरी या पार्थिव ग्रह (Inner or Terrestrial Planets) : इन आठ ग्रहों में बुध, शुक्र, पृथ्वी व मंगल भीतरी ग्रह कहलाते हैं, क्योंकि ये सूर्य व क्षुद्रग्रहों की पट्टी के बीच स्थित हैं। ये ग्रह पार्थिव ग्रह भी कहे जाते हैं। इसका अर्थ है कि ये ग्रह पृथ्वी की भाँति ही शैलों और धातुओं से बने हैं और अपेक्षाकृत अधिक घनत्व वाले ग्रह हैं।

बाहरी या विशाल ग्रह (Outer or Jovian planets): अन्य चार ग्रह बाहरी ग्रह कहलाते हैं। ये ग्रह गैसों से बने हैं जो विशाल ग्रह या जोवियन ग्रह भी कहलाते हैं। जोवियन का अर्थ है-बृहस्पति की तरह। इनमें से अधिकतर पार्थिव ग्रहों से विशाल हैं और हाइड्रोजन व हीलियम से बना सघन वायुमंडल है।

अभी तक प्लूटो को भी एक ग्रह माना जाता था, परन्तु अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी संगठन ने अपनी बैठक (अगस्त 2006) में यह निर्णय लिया कि कुछ समय पहले खोजे गए अन्य खगोलीय पिण्ड (2003 UB313) तथा प्लूटो ‘बौने ग्रह’ कहे जा सकते हैं।

सौर परिवार के सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। इनके परिक्रमा पथ दीर्घवृत्ताकार हैं जिन्हें कक्षा कहते हैं। शुक्र और यूरेनस को छोड़कर अन्य सभी ग्रहों के घूर्णन और परिक्रमण की दिशा एक ही रहती है।

पृथ्वी-हमारा ग्रह (Earth : Our Planet)

पृथ्वी हमारा ग्रह है। सूर्य से दूरी के क्रम में इसका तीसरा स्थान है। आकार की दृष्टि से पृथ्वी का स्थान पाँचवाँ है। आकार और बनावट में पृथ्वी शुक्र ग्रह के समान है।

अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखा है और उनका कहना है कि पृथ्वी नीली दिखायी देती है। इसके नीले दिखने का कारण पानी है। इसीलिए इसे नीलाग्रह भी कहते हैं।

चद्रमा (THE MOON) :

पृथ्वी का अकेला प्राकृतिक उपग्रह है। ऐसा मानना है कि पृथ्वी के बनने के कुछ समय बाद ही मंगल ग्रह के 1 से 3 गुणा बड़े आकार का पिंड पृथ्वी से टकराया। इस टकराव से पृथ्वी का एक हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में बिखर गया। टकराव से अलग हुआ यह पदार्थ फिर पृथ्वी की कक्षा में घूमने लगा और क्रमशः आज का चन्द्रमा बना।

चन्द्रमा पृथ्वी का सहचर ग्रह (THE MOON : EARTHIS ASSOCIATE)

चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक चौथाई है। पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी लगभग 3,84,000 किलोमीटर है। चन्द्रमा द्वारा परावर्तित प्रकाश हम तक 1.25 सेकण्ड में पहुँचता चन्द्रमा पृथ्वी की एक परिक्रमा 27 दिन और 8 घंटे में पूरी करता है। इतने ही समय में यह अपने अक्ष पर एक चक्कर लगाता है। यही कारण है कि हमें चन्द्रमा का सदैव एक ही भाग दिखाई पड़ता है।

अक्षांश और देशान्तर रेखाएँ (LATITUDES & LONGITUDE)

अक्षांश (Latitudes) : पृथ्वी का अक्ष एक काल्पनिक रेखा है जो उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को मिलाती हुई खींची गई है। विषुवत् वृत्त का प्रत्येक बिंदु दोनों ध्रुवों के ठीक बीच में पड़ता है। इस प्रकार यह पृथ्वी को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। विषुवत् वृत्त के उत्तरी भाग को उत्तरी गोलार्द्ध और दक्षिणी भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं।

विषुवत् वृत्त 0° अक्षांश को प्रदर्शित करता है। विषुवत् वृत्त से दोनों में से किसी भी ध्रुव की दूरी पृथ्वी की परिधि का चौथाई भाग है। दूसरे शब्दों में, यह 360 अंश के 1/4 भाग अर्थात् 90° की माप है। इस प्रकार, 90 अंश उत्तरी अक्षांश उत्तरी ध्रुव को और 90 अंश दक्षिणी अक्षांश दक्षिणी ध्रुव को प्रदर्शित करता है।

प्रमुख अक्षांश वृत्त IMPORTANT LATITUDINAL CIRCLE)

कर्कवृत्त : कर्क वृत्त उत्तरी गोलार्द्ध में एक महत्वपूर्ण मानक मृत है। यह विषुवत् वृत्त से 23-1/2 ° उत्तर (23°30′ उत्तर)दूरी पर है।

मकर वृत्त : दूसरा प्रमुख वृत्त मकर वृत्त (23°30′ दक्षिण) है यह कर्कवृत्त के समान ही है, लेकिन दक्षिणी गोलार्द्ध में है।

आकटिक वृत्त : आर्कटिक वृत्त विषुवत् वृत्त के उत्तरी स्थालाई – 66-1/2° उत्तर (66°30′ उत्तर) अक्षांश की दूरी पर है।

अटार्कटिक वृत्त : अंटार्कटिक वृत्त (66°30′ दक्षिण) आकाटक वृत्त के समान है, लेकिन यह दक्षिणी गोलार्द्ध में है।

 

 

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