नई शिक्षा नीति से लगेगी लगाम-ट्यूशन कारोबर पर काफी बुरा असर

what national education policy

नई शिक्षा नीति से लगेगी लगाम-ट्यूशन कारोबर पर काफी बुरा असर

 

JMKTIMES! सरकार ने हाल फिलहाल में नई शिक्षा नीति (what national education policy) लागू की है। माना जा रहा है कि इससे देश में चल रहे हजारों करोड़ के ट्यूशन कारोबर पर काफी बुरा असर होगा। नई शिक्षा नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि स्कूल में ऐसे विषय पढ़ाए जाएं जिससे बच्चों का मकसद सीखना बने कि उन्हें प्राइवेट कोचिंग जाने की जरूरत ना  हो।

 

जानकार हैरानी होगी कि केंद्र सरकार का डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन ऐंड लिट्रेसी का बजट 59845 करोड़ है। प्राइवेट ट्यूशन का खर्च बजट का करीब आधा है। यह रिपोर्ट NSO द्वारा हाल में जारी सर्वे ऑफ एजुकेशन 2017-18 और शिक्षा मंत्रालय के डेटा पर आधारित है।



 

हायर सेकेंड्री लेवल पर प्राइवेट कोचिंग के लिए (what national education policy)  एक छात्र पर सालाना औसतन खर्च 2516 रुपये है। यह खर्च सेकेंड्री लेवल पर 1632 रुपये, अपर प्राइमरी के लिए 845 रुपये और प्राइमरी के लिए 502 रुपये है। प्री-प्राइमरी लेवल पर बच्चों पर औसतन खर्च 300 रुपये है।

 


रिपोर्ट में कहा गया है कि माता-पिता द्वारा भारत में हर साल स्कूल एजुकेशन के नाम पर 1.9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें से आधा पैसा एजुकेशन फीस के रूप में खर्च हो जाते हैं। 20 फीसदी करीब किताब खर्च में जाते हैं और 13 फीसदी हिस्सा प्राइवेट ट्यूशन में खर्च होते हैं।

 

बता दें कि न्यू नैशनल एजुकेशनल पॉलिसी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर बच्चे में स्किल डिवेलप किया जा सके।

नई शिक्षा नीति में वादा किया गया है कि सरकार इस दिशा में जीडीपी का 6 फीसदी तक खर्च करेगी। हालांकि इस पॉलिसी की सबसे बड़ी चुनौती होगी शिक्षकों को नए पाठ्यक्रम और सोच के मुताबिक तैयार करना और बदलना।

 

 

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